वास्तविकता यह है कि बहुत कुछ नहीं बदला है। दोनों पक्ष एक-दूसरे को स्पष्ट रूप से समझने में असमर्थ हैं और गलत धारणाएँ, राष्ट्रवाद तथा समग्र रणनीतिक अविश्वास इस रिश्ते को आगे बढ़ाने वाली प्रमुख शक्तियाँ बन गई हैं। आपसी समझ विकसित करने की तमाम बातों के बावजूद, व्यवहार में खाई न केवल सरकारों के बीच बल्कि लोगों के बीच भी बनी हुई है। नवंबर 2025 में…
